Digital Public Infrastructure (DPI) क्या है? India Stack, इसके घटक, फायदे और चुनौतियां
संपादकीय नोट: यह लेख Digital Public Infrastructure यानी DPI की अवधारणा, India Stack के प्रमुख घटकों और उसके सामाजिक-आर्थिक प्रभाव को समझाने के लिए तैयार किया गया है। आंकड़े और नीतिगत जानकारी समय के साथ बदल सकती है, इसलिए किसी सरकारी सेवा का उपयोग करने से पहले संबंधित आधिकारिक वेबसाइट पर नवीनतम जानकारी अवश्य देखें।
Digital Public Infrastructure क्या है?
Digital Public Infrastructure यानी डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना ऐसे मूलभूत डिजिटल सिस्टम का समूह है, जिनके सहारे नागरिक, सरकार, बैंक और निजी संस्थाएं सुरक्षित तथा interoperable तरीके से सेवाओं का उपयोग कर सकती हैं। जैसे भौतिक अर्थव्यवस्था में सड़क, बिजली और रेल जैसी सुविधाएं अलग-अलग गतिविधियों के लिए आधार तैयार करती हैं, उसी तरह DPI डिजिटल अर्थव्यवस्था और डिजिटल शासन के लिए आधारभूत ढांचा उपलब्ध कराता है।
सरल शब्दों में कहें तो DPI कोई एक मोबाइल ऐप या वेबसाइट नहीं है। यह उन साझा डिजिटल प्रणालियों, नियमों, तकनीकी मानकों और API आधारित ढांचों का नेटवर्क है, जिन पर अनेक सेवाएं बनाई जा सकती हैं। भारत में Aadhaar, Unified Payments Interface यानी UPI, DigiLocker, Account Aggregator, Direct Benefit Transfer और Open Network for Digital Commerce जैसे उदाहरण इस व्यापक डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र से जुड़े हैं। India Stack की आधिकारिक वेबसाइट इसे पहचान, भुगतान और डेटा से जुड़े खुले API तथा डिजिटल सार्वजनिक संसाधनों के समूह के रूप में बताती है। [1]
DPI का उद्देश्य केवल सरकारी काम को ऑनलाइन करना नहीं है। इसका बड़ा लक्ष्य यह है कि डिजिटल सेवाएं सुलभ, कम लागत वाली, सुरक्षित, आपस में जुड़ी हुई और बड़े स्तर पर उपयोग योग्य बनें। इसी कारण DPI को डिजिटल समावेशन, वित्तीय समावेशन, सुशासन और नवाचार से जोड़कर देखा जाता है।
India Stack और DPI में क्या संबंध है?
भारत के संदर्भ में India Stack शब्द उन डिजिटल प्लेटफॉर्म, खुले API और सार्वजनिक डिजिटल प्रणालियों के लिए इस्तेमाल किया जाता है, जो पहचान, भुगतान, दस्तावेज, डेटा और सेवा वितरण को आसान बनाते हैं। इसे किसी एक संस्था का अकेला उत्पाद समझना सही नहीं होगा। यह समय के साथ विकसित हुआ एक व्यापक ecosystem है, जिसमें सरकारी संस्थाओं, नियामकों, बैंकों और निजी नवाचारकर्ताओं की भूमिका रही है।
India Stack का विचार इस सिद्धांत पर आधारित है कि हर सेवा के लिए अलग-अलग और महंगे डिजिटल ढांचे बनाने के बजाय कुछ साझा rails तैयार किए जाएं। इन rails पर अलग-अलग संस्थाएं अपने अनुप्रयोग विकसित कर सकती हैं। इससे दोहराव कम होता है, सेवा निर्माण की लागत घट सकती है और नागरिकों को अनेक सेवाओं तक पहुंचने के लिए कम प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता है।
| DPI का आधार | भारत में प्रमुख उदाहरण | नागरिकों के लिए उपयोग |
| डिजिटल पहचान | Aadhaar और authentication सेवाएं | पहचान सत्यापन और सेवा तक पहुंच |
| डिजिटल भुगतान | UPI और अन्य payment rails | त्वरित बैंक एवं merchant payments |
| डिजिटल दस्तावेज | DigiLocker | प्रमाणित दस्तावेजों को संग्रहित और साझा करना |
| सहमति आधारित डेटा | Account Aggregator framework | वित्तीय डेटा साझा करने पर व्यक्ति का नियंत्रण |
| डिजिटल सेवा पहुंच | UMANG, e-Courts और अन्य पोर्टल | सरकारी सेवाओं तक ऑनलाइन पहुंच |
| डिजिटल व्यापार | ONDC | खरीदारों और विक्रेताओं को खुले नेटवर्क से जोड़ना |
Digital Public Infrastructure की प्रमुख विशेषताएं
एक अच्छे DPI की पहचान केवल उसकी तकनीकी क्षमता से नहीं, बल्कि उसके शासन और उपयोग के तरीके से भी होती है। पहली महत्वपूर्ण विशेषता interoperability है। इसका अर्थ है कि अलग-अलग सिस्टम तय मानकों के आधार पर एक-दूसरे के साथ काम कर सकें। यदि बैंक, सरकारी विभाग और सेवा प्रदाता एक-दूसरे से सुरक्षित रूप से जुड़ सकें, तो नागरिकों को एक ही जानकारी बार-बार जमा करने की आवश्यकता कम हो सकती है।
दूसरी विशेषता openness है। खुले API और स्पष्ट तकनीकी मानक निजी क्षेत्र, startups और सामाजिक संस्थाओं को नए समाधान बनाने का अवसर देते हैं। इसका अर्थ यह नहीं है कि हर डेटा सार्वजनिक हो जाता है। openness का संबंध मुख्यतः उस तकनीकी ढांचे से है, जिससे अधिकृत संस्थाएं नियमों के अनुसार सेवाओं को जोड़ सकें।
तीसरी विशेषता inclusiveness है। DPI तभी सफल माना जाएगा, जब वह केवल महानगरों या उच्च आय वाले उपयोगकर्ताओं के लिए न हो। कम लागत, स्थानीय भाषाओं, assisted access, कम bandwidth में काम करने वाली सेवाओं और डिजिटल साक्षरता जैसे पहलुओं पर ध्यान देना आवश्यक है।
चौथी विशेषता सुरक्षा और privacy है। डिजिटल पहचान और वित्तीय लेनदेन से जुड़े सिस्टम में मजबूत authentication, access controls, audit trails और शिकायत निवारण व्यवस्था की जरूरत होती है। G20 Troika के 2024 communiqué में DPI के लिए open, modular, interoperable, scalable, secure और privacy-respecting design principles पर जोर दिया गया है। [2]
India Stack के प्रमुख घटक
1. Aadhaar और डिजिटल पहचान
Aadhaar भारत की डिजिटल पहचान व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसका उपयोग पहचान सत्यापन और कुछ सेवाओं में authentication के लिए किया जाता है। डिजिटल पहचान के कारण बैंक खाता खोलने, सरकारी लाभ तक पहुंच बनाने और कुछ सेवाओं में KYC प्रक्रिया को तेज करने में मदद मिल सकती है।
हालांकि, Aadhaar को हर समस्या का समाधान मानना उचित नहीं है। पहचान सत्यापन में तकनीकी असफलता, डेटा की शुद्धता, privacy, authentication की आवश्यकता और वैकल्पिक पहचान माध्यमों जैसे मुद्दों पर लगातार ध्यान देना पड़ता है। किसी भी नागरिक को केवल तकनीकी या biometric समस्या के कारण आवश्यक सेवा से वंचित नहीं किया जाना चाहिए। इसलिए मजबूत grievance redressal और offline या alternative mechanisms भी महत्वपूर्ण हैं।
2. UPI और डिजिटल भुगतान
Unified Payments Interface यानी UPI ने भारत में retail digital payments को सरल बनाया है। UPI के माध्यम से उपयोगकर्ता मोबाइल ऐप, QR code, virtual payment address या अन्य समर्थित माध्यमों से बैंक खातों के बीच भुगतान कर सकते हैं। इसकी interoperability का अर्थ है कि अलग-अलग बैंक और payment apps एक साझा framework पर लेनदेन कर सकते हैं।
छोटे दुकानदार, freelancers, घरेलू उद्यम और आम उपभोक्ता इसके माध्यम से कम समय में भुगतान स्वीकार या भेज सकते हैं। डिजिटल भुगतान से लेनदेन का रिकॉर्ड बनता है, cash handling की जरूरत घटती है और कुछ छोटे व्यवसाय formal financial ecosystem से जुड़ सकते हैं। फिर भी cyber fraud, गलत UPI request, phishing और account security के प्रति सावधानी आवश्यक है। PIN, OTP और screen-sharing access कभी भी अनजान व्यक्ति के साथ साझा नहीं करना चाहिए।
3. DigiLocker और डिजिटल दस्तावेज
DigiLocker नागरिकों को डिजिटल दस्तावेजों को प्राप्त करने, देखने और अधिकृत संस्थाओं के साथ साझा करने की सुविधा देता है। Driving licence, marksheet और अन्य प्रमाणित records जैसे दस्तावेजों के डिजिटल संस्करण कागजी प्रतियों पर निर्भरता कम कर सकते हैं। PIB के मार्च 2026 के backgrounder में DigiLocker के बड़े user base और जारी किए गए दस्तावेजों का उल्लेख किया गया है। [3]
इसके उपयोग से समय बच सकता है और दस्तावेज खोने या खराब होने का जोखिम कम हो सकता है। फिर भी उपयोगकर्ता को यह समझना चाहिए कि हर संस्था में हर दस्तावेज की स्वीकार्यता अलग हो सकती है। किसी परीक्षा, नौकरी या सरकारी आवेदन में दस्तावेज जमा करने से पहले संबंधित विभाग के निर्देश देखना बेहतर है।
4. Account Aggregator framework
Account Aggregator व्यवस्था का उद्देश्य व्यक्ति की अनुमति के आधार पर वित्तीय डेटा साझा करना आसान बनाना है। इसमें व्यक्ति यह तय कर सकता है कि उसका कौन-सा डेटा, किस वित्तीय संस्था के साथ और किस उद्देश्य के लिए साझा किया जाए। इस मॉडल का संभावित उपयोग loan application, personal finance management और बेहतर financial planning में हो सकता है।
यहां सबसे महत्वपूर्ण शब्द consent यानी सहमति है। सहमति स्पष्ट, उद्देश्य-विशिष्ट और समझने योग्य होनी चाहिए। उपयोगकर्ता को किसी भी data-sharing request को स्वीकार करने से पहले संस्था, उद्देश्य, अवधि और मांगी जा रही जानकारी की सीमा को समझना चाहिए। केवल डिजिटल सुविधा उपलब्ध होना पर्याप्त नहीं है; data governance और consumer awareness भी उतने ही जरूरी हैं।
5. JAM Trinity और Direct Benefit Transfer
भारत के डिजिटल समावेशन की चर्चा में JAM Trinity का विशेष महत्व है। JAM का अर्थ Jan Dhan bank accounts, Aadhaar और Mobile connectivity से है। इन तीनों के मेल से कई लोगों को बैंकिंग व्यवस्था, पहचान और मोबाइल आधारित सेवाओं से जोड़ने का प्रयास किया गया। PIB के अनुसार, यह convergence आगे चलकर डिजिटल welfare delivery के लिए आधार बना। [3]
Direct Benefit Transfer यानी DBT के माध्यम से सरकारी लाभ पात्र व्यक्ति के बैंक खाते तक सीधे पहुंचाने का प्रयास किया जाता है। इससे बिचौलियों की भूमिका घट सकती है, भुगतान का digital record बनता है और लाभ वितरण की निगरानी आसान हो सकती है। लेकिन DBT की सफलता के लिए सही beneficiary database, बैंकिंग पहुंच, authentication विकल्प, समय पर correction और स्थानीय सहायता केंद्र जरूरी हैं। तकनीक को लागू करने के साथ-साथ मानवीय सहायता व्यवस्था बनाए रखना भी आवश्यक है।
6. ONDC और खुला डिजिटल व्यापार
Open Network for Digital Commerce यानी ONDC को digital commerce को किसी एक marketplace तक सीमित न रखने की दिशा में एक open network model के रूप में समझा जा सकता है। इसका उद्देश्य खरीदारों, sellers और logistics या अन्य service providers को interoperable network के माध्यम से जोड़ना है।
ऐसा model छोटे व्यवसायों को digital market तक पहुंचने का अवसर दे सकता है। दुकानदारों को केवल एक बड़े platform की शर्तों पर निर्भर रहने के बजाय विभिन्न participant applications के माध्यम से visibility मिल सकती है। हालांकि, seller onboarding, product quality, returns, delivery, customer support और platform accountability जैसे practical मुद्दे भी महत्वपूर्ण हैं। किसी भी खुले नेटवर्क की सफलता केवल तकनीक पर नहीं, बल्कि भरोसे और स्पष्ट consumer protection पर निर्भर करती है।
7. UMANG और e-governance platforms
UMANG जैसे platforms का उद्देश्य विभिन्न सरकारी सेवाओं को एक single-window अनुभव के माध्यम से उपलब्ध कराना है। Pension, scholarship, utility services, EPFO, exam results और अन्य सुविधाओं के लिए नागरिकों को अलग-अलग portals खोजने की जरूरत कम हो सकती है। e-Courts जैसी परियोजनाएं न्यायिक प्रक्रियाओं से संबंधित सूचना और सेवाओं को अधिक accessible बनाने के लिए ICT का उपयोग करती हैं।
यहां user experience बहुत महत्वपूर्ण है। यदि portal धीमा हो, भाषा विकल्प सीमित हों, form instructions अस्पष्ट हों या complaint status दिखाई न दे, तो केवल online उपलब्धता नागरिक के लिए वास्तविक सुविधा नहीं बनती। इसलिए accessibility, सरल भाषा, mobile compatibility और human support को DPI design का हिस्सा माना जाना चाहिए।
DPI से शासन और अर्थव्यवस्था को क्या लाभ हो सकता है?
DPI का पहला बड़ा लाभ सेवा वितरण में गति और पारदर्शिता है। डिजिटल verification, online tracking और electronic payments के कारण आवेदन, भुगतान और शिकायत की स्थिति को बेहतर तरीके से देखा जा सकता है। इससे प्रशासनिक देरी कम करने में मदद मिल सकती है, हालांकि परिणाम विभाग और implementation quality के अनुसार अलग हो सकते हैं।
दूसरा लाभ वित्तीय समावेशन है। बैंक खाते, मोबाइल connectivity और instant payments मिलकर छोटे लेनदेन को आसान बना सकते हैं। जिन लोगों के पास पहले औपचारिक वित्तीय सेवाओं की सीमित पहुंच थी, वे savings, payments, insurance या credit से जुड़ने का अवसर पा सकते हैं।
तीसरा लाभ नवाचार और entrepreneurship है। यदि startups को identity, payments या document verification के लिए हर बार पूरा infrastructure शून्य से न बनाना पड़े, तो वे user-facing solutions पर ध्यान दे सकते हैं। इससे health-tech, ed-tech, fintech, logistics और public service applications में नए प्रयोग संभव होते हैं।
चौथा लाभ नीति निर्माण में बेहतर डेटा उपयोग है। सही safeguards के साथ aggregated और anonymised data से सरकारों को demand patterns, service gaps और regional disparities समझने में मदद मिल सकती है। लेकिन data-driven governance का अर्थ यह नहीं कि नागरिक की privacy समाप्त हो जाए। Data minimisation, purpose limitation और accountability आवश्यक सिद्धांत हैं।
DPI से जुड़ी चुनौतियां और आलोचनाएं
DPI के लाभों के साथ कई गंभीर चुनौतियां भी जुड़ी हैं। पहली चुनौती digital divide है। हर नागरिक के पास smartphone, reliable internet, पर्याप्त data या digital literacy नहीं होती। बुजुर्ग, दिव्यांग, दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले लोग और कम आय वाले परिवार डिजिटल सेवाओं के दौरान अतिरिक्त कठिनाइयों का सामना कर सकते हैं। इसलिए assisted service centres, telephone support और offline विकल्प जरूरी हैं।
दूसरी चुनौती privacy और data protection है। पहचान, स्वास्थ्य, वित्त और शिक्षा से संबंधित जानकारी संवेदनशील होती है। यदि data access का दायरा अस्पष्ट हो, सुरक्षा कमजोर हो या consent केवल औपचारिक checkbox बन जाए, तो नागरिकों का भरोसा प्रभावित हो सकता है। DPI projects में privacy by design को शुरुआत से शामिल करना चाहिए, बाद में जोड़ना पर्याप्त नहीं है।
तीसरी चुनौती cybersecurity और fraud है। बड़ी digital systems attackers के लिए आकर्षक लक्ष्य होते हैं। Phishing, fake customer-care numbers, malicious links, SIM-related fraud और unauthorised access जैसी समस्याएं आम उपयोगकर्ताओं को नुकसान पहुंचा सकती हैं। तकनीकी सुरक्षा के साथ नागरिक जागरूकता, तेज शिकायत समाधान और जिम्मेदार संस्थागत response भी आवश्यक है।
चौथी चुनौती exclusion by design है। यदि कोई portal केवल एक भाषा में हो, biometric authentication ही एकमात्र रास्ता हो या error message समझ से बाहर हो, तो formally digital सेवा practically inaccessible बन सकती है। समावेशन के लिए multilingual design, accessibility standards और alternative verification mechanisms पर ध्यान देना होगा।
पांचवीं चुनौती competition और accountability है। खुले digital rails नवाचार को बढ़ावा दे सकते हैं, लेकिन बड़े platforms और data-rich intermediaries के बीच शक्ति का असंतुलन भी पैदा हो सकता है। नागरिकों को पता होना चाहिए कि समस्या होने पर किस संस्था से संपर्क करना है और किसकी जवाबदेही तय होगी।
भारत और विश्व के लिए DPI का महत्व
भारत के DPI अनुभव ने वैश्विक नीति चर्चा में रुचि पैदा की है। G20 के मंचों पर digital public infrastructure, digital public goods, AI और data governance जैसे विषयों पर चर्चा हुई है। 2023 में G20 Digital Economy Ministers के outcome documents में Global Digital Public Infrastructure Repository जैसी पहल का उल्लेख किया गया था, जबकि 2024 के G20 Troika communiqué ने inclusive और secure digital transformation पर जोर दिया। [2] [4]
भारत का model दूसरे देशों के लिए सीधे copy-paste solution नहीं हो सकता। हर देश की कानूनी व्यवस्था, जनसंख्या, भाषा, बैंकिंग प्रणाली, privacy norms और connectivity अलग होती है। फिर भी open standards, modular architecture, consent-based data sharing और affordable payments जैसे विचारों को स्थानीय जरूरत के अनुसार अपनाया जा सकता है। असली सीख किसी एक app से अधिक design principles और governance capacity में है।
भविष्य में DPI किस दिशा में बढ़ सकता है?
आने वाले वर्षों में DPI का विस्तार health records, education credentials, skill certification, logistics, climate services और cross-border payments जैसे क्षेत्रों में हो सकता है। Artificial Intelligence का उपयोग service delivery और policy analysis में किया जा सकता है, लेकिन AI systems में bias, explainability और data protection पर सावधानी बरतनी होगी। Blockchain या distributed ledger जैसी तकनीकों का उपयोग कुछ विशेष परिस्थितियों में किया जा सकता है, पर हर समस्या के लिए एक ही तकनीक को अनिवार्य समाधान मानना उचित नहीं है।
भविष्य का बेहतर DPI वही होगा जो तेज होने के साथ-साथ समझने योग्य भी हो। नागरिकों को यह मालूम होना चाहिए कि उनका डेटा क्यों लिया जा रहा है, कितने समय तक रखा जाएगा और समस्या होने पर सुधार कैसे कराया जा सकता है। तकनीकी innovation के साथ कानून, संस्थागत जवाबदेही और नागरिक अधिकारों का संतुलन बनाए रखना आवश्यक होगा।
प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण बिंदु
UPSC, State PCS, SSC और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में DPI को केवल परिभाषा के रूप में नहीं, बल्कि governance, economy, inclusion और privacy के संबंध में पूछा जा सकता है। उत्तर लिखते समय DPI की परिभाषा के बाद India Stack के उदाहरण, JAM Trinity, DBT, interoperability, open API और data protection को जोड़ना उपयोगी रहेगा।
एक अच्छे analytical answer में केवल उपलब्धियां लिखना पर्याप्त नहीं है। उसमें digital divide, authentication failure, cyber risk, privacy, accountability और alternative access mechanisms जैसी चुनौतियों का संतुलित उल्लेख होना चाहिए। निष्कर्ष में यह कहा जा सकता है कि DPI technology को public value में बदलने का माध्यम है, लेकिन इसका परिणाम implementation, regulation और citizen-centric design पर निर्भर करता है।
| परीक्षा के लिए विषय | उत्तर में शामिल किए जा सकने वाले शब्द |
| परिभाषा | foundational digital systems, public interest, interoperability |
| आर्थिक प्रभाव | financial inclusion, low-cost payments, formalisation |
| शासन | transparency, DBT, service delivery, accountability |
| सामाजिक पक्ष | inclusion, digital literacy, assisted access |
| चुनौतियां | privacy, cybersecurity, exclusion, data governance |
| निष्कर्ष | citizen-centric, secure, scalable and inclusive DPI |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
क्या Digital Public Infrastructure केवल सरकारी वेबसाइटों का नाम है?
नहीं। DPI में digital platforms के साथ-साथ APIs, technical standards, identity और payment rails, data governance rules तथा access mechanisms शामिल होते हैं। सरकारी वेबसाइटें इन प्रणालियों पर उपलब्ध सेवाओं का एक हिस्सा हो सकती हैं।
India Stack के मुख्य उदाहरण कौन-से हैं?
Aadhaar, UPI, DigiLocker और Account Aggregator को India Stack से जुड़े प्रमुख उदाहरणों के रूप में समझा जाता है। JAM, DBT, UMANG और ONDC भारत के व्यापक digital governance और digital economy ecosystem से जुड़े महत्वपूर्ण initiatives हैं।
क्या DPI और digitalisation एक ही बात है?
Digitalisation किसी existing प्रक्रिया या रिकॉर्ड को digital format में बदलने से संबंधित हो सकती है। DPI इससे व्यापक अवधारणा है, क्योंकि इसमें साझा, interoperable और reusable digital rails का निर्माण शामिल होता है, जिन पर अनेक सेवाएं विकसित की जा सकें।
DPI का सबसे बड़ा लाभ क्या है?
इसका प्रमुख संभावित लाभ यह है कि पहचान, भुगतान और सेवा वितरण जैसी मूलभूत क्षमताओं को साझा infrastructure के रूप में उपलब्ध कराया जा सकता है। इससे लागत और समय घट सकते हैं तथा नवाचार को बढ़ावा मिल सकता है। वास्तविक लाभ implementation और नागरिकों की पहुंच पर निर्भर करता है।
DPI की सबसे बड़ी चुनौती क्या है?
एक ही चुनौती चुनना कठिन है, लेकिन privacy, cybersecurity और digital exclusion सबसे महत्वपूर्ण चिंताओं में शामिल हैं। डिजिटल सुविधा तभी सफल मानी जाएगी जब नागरिक का डेटा सुरक्षित रहे और जिन लोगों के पास digital access नहीं है, उनके लिए वैकल्पिक सहायता उपलब्ध हो।
निष्कर्ष
Digital Public Infrastructure आधुनिक शासन और अर्थव्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण आधार बनकर उभरा है। India Stack के माध्यम से भारत ने डिजिटल पहचान, payments, documents, consent-based data sharing और citizen services के लिए बड़े पैमाने पर systems विकसित किए हैं। इन प्रणालियों ने वित्तीय समावेशन, सेवा वितरण और digital innovation के लिए नए अवसर बनाए हैं।
फिर भी DPI की सफलता को केवल transaction numbers या app downloads से नहीं मापा जाना चाहिए। असली कसौटी यह है कि क्या आम नागरिक को सेवा आसानी से मिलती है, क्या उसका डेटा सुरक्षित रहता है, क्या शिकायत का समाधान होता है और क्या कमजोर वर्ग भी समान रूप से शामिल हैं। इसलिए भविष्य का DPI खुला, सुरक्षित, जवाबदेह, privacy-respecting और नागरिक-केंद्रित होना चाहिए। यही दृष्टिकोण डिजिटल परिवर्तन को वास्तविक सामाजिक और आर्थिक प्रगति में बदल सकता है।
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